कुरान - 40:56 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

56
إِنَّ ٱلَّذِينَ يُجَٰدِلُونَ فِيٓ ءَايَٰتِ ٱللَّهِ بِغَيۡرِ سُلۡطَٰنٍ أَتَىٰهُمۡ إِن فِي صُدُورِهِمۡ إِلَّا كِبۡرٞ مَّا هُم بِبَٰلِغِيهِۚ فَٱسۡتَعِذۡ بِٱللَّهِۖ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلۡبَصِيرُ

Transliteration: (Innal lazeena yujaadi loona feee Aayaatil laahi bighairi sultaanin ataahum in fee sudoorihim illaa kibrum maa hum bibaaligheeh; fasta'iz billaahi innahoo Huwas Samee'ul Baseer)

बेशक जो लोग अल्लाह की आयतों में बग़ैर किसी सनद के जो उनके पास आई हो झगड़ते हैं [142], उनके सीनों में सिर्फ़ बड़ाई का घमंड है जिस तक वे कभी नहीं पहुँच सकेंगे [143] [144]; तो आप अल्लाह की पनाह मांगिए, बेशक वही सब कुछ सुनने वाला, देखने वाला है [145] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 56 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 56

"बेशक जो लोग अल्लाह की आयतों में बग़ैर किसी सनद के जो उनके पास आई हो झगड़ते हैं [142], उनके सीनों में सिर्फ़ बड़ाई का घमंड है जिस तक वे कभी नहीं पहुँच सकेंगे [143] [144]; तो आप अल्लाह की पनाह मांगिए, बेशक वही सब कुछ सुनने वाला, देखने वाला है [145] ।"

[142] बिला सनद एतराज़ात

कुफ़्फ़ार-ए-मक्का के एतराज़ात महज़ हसद और तकब्बुर पर मब्नी थे।

[143] सीनों में झूठी बड़ाई का कीना

वे चाहते थे कि हुज़ूर ﷺ की नबुव्वत का इनकार करके अपनी झूठी चौधराहट क़ायम रखें।

[144] तकब्बुर की नाकामी

अल्लाह ने फ़रमाया कि वे कभी उस झूठी बड़ाई तक नहीं पहुँच सकेंगे, बल्कि ज़लील व रुसवा होंगे।

[145] पनाह-ए-इलाही

अल्लाह ही तमाम शर पसंदों के शर से पनाह देने वाला समीअ व बसीर है।

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