कुरान - 40:58 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

58
وَمَا يَسۡتَوِي ٱلۡأَعۡمَىٰ وَٱلۡبَصِيرُ وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّـٰلِحَٰتِ وَلَا ٱلۡمُسِيٓءُۚ قَلِيلٗا مَّا تَتَذَكَّرُونَ

Transliteration: (Wa maa yastawil a'maa walbaseeru wallazeena aamanoo wa 'amilus saalihaati wa lal museee'; qaleelam maa tatazakkaroon)

और अंधा और आँखों वाला बराबर नहीं, और न ईमान वाले और नेक अमल करने वाले और बदकार बराबर हैं [148]; तुम कितना कम नसीहत क़बूल करते हो! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 58 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 58

"और अंधा और आँखों वाला बराबर नहीं, और न ईमान वाले और नेक अमल करने वाले और बदकार बराबर हैं [148]; तुम कितना कम नसीहत क़बूल करते हो!"

[148] मोमिन और काफ़िर का फ़र्क़

'अंधा' काफ़िर और 'आँखों वाला' मोमिन है। इसी तरह नेक अमल करने वाला मुत्तक़ी और गुनाहों में डूबा बदकार बराबर नहीं हो सकते। दोनों का अंजाम भी ज़मीन व आसमान का फ़र्क़ रखता है।

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