कुरान - 40:59 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

59
إِنَّ ٱلسَّاعَةَ لَأٓتِيَةٞ لَّا رَيۡبَ فِيهَا وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يُؤۡمِنُونَ

Transliteration: (Innas Saa'ata la aatiyatul laa raiba feehaa wa laakinna aksaran naasi laa yu'minoon)

बेशक क़ियामत ज़रूर आने वाली है [149], इसमें कोई शक नहीं; लेकिन अक्सर लोग ईमान नहीं लाते [150] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 59 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 59

"बेशक क़ियामत ज़रूर आने वाली है [149], इसमें कोई शक नहीं; लेकिन अक्सर लोग ईमान नहीं लाते [150] ।"

[149] क़ियामत की यक़ीनी आमद

क़ियामत का आना बिल्कुल बरहक़ और यक़ीनी है। वह अचानक एक लम्हे में बरपा होगी।

[150] अक्सर लोगों की ग़फ़लत

अनगिनत निशानियों के बावजूद अक्सर लोग दुनिया की लज़्ज़तों में मस्त होकर आख़िरत को भुलाए बैठे हैं।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now