कुरान - 40:61 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

61
ٱللَّهُ ٱلَّذِي جَعَلَ لَكُمُ ٱلَّيۡلَ لِتَسۡكُنُواْ فِيهِ وَٱلنَّهَارَ مُبۡصِرًاۚ إِنَّ ٱللَّهَ لَذُو فَضۡلٍ عَلَى ٱلنَّاسِ وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يَشۡكُرُونَ

Transliteration: (Allaahul lazee ja'ala lakumul laila littaskunoo feehi wannahaara mubsiraa; innal laaha lazoo fadlin 'alan naasi wa laakinna aksaran naasi laa yashkuroon)

अल्लाह ही है जिसने तुम्हारे लिए रात बनाई ताकि तुम उसमें आराम पाओ [154], और दिन को देखने वाला (रोशन) बनाया [155]; बेशक अल्लाह लोगों पर बड़ा फ़ज़्ल फ़रमाने वाला है [156], लेकिन अक्सर लोग नाशुुक्री करते हैं [157] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 61 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 61

"अल्लाह ही है जिसने तुम्हारे लिए रात बनाई ताकि तुम उसमें आराम पाओ [154], और दिन को देखने वाला (रोशन) बनाया [155]; बेशक अल्लाह लोगों पर बड़ा फ़ज़्ल फ़रमाने वाला है [156], लेकिन अक्सर लोग नाशुुक्री करते हैं [157] ।"

[154] रात की नेमत और आराम

अल्लाह तआला ने रात को अंधेरी और पुरसुकून बनाया ताकि जिस्मानी और रूहानी थकान दूर हो। रात का पहला हिस्सा नींद और आराम के लिए है, और पिछला हिस्सा इबादत, तहाज्जुद और मुनाजात-ए-इलाही के लिए बेहतरीन वक़्त है।

[155] दिन की रौशनी और मआश

दिन को रौशन फ़रमाया ताकि इंसान अपने काम-काज, रिज़्क़ की तलाश और दुनियावी व दीनी उमूर बा-आसानी अंजाम दे सके।

[156] फ़ज़्ल-ए-इलाही का एहाता

ज़िंदगी, सेहत, वक़्त और रिज़्क़ सब अल्लाह का मुफ़्त फ़ज़्ल व एहसान हैं।

[157] नाशुुक्री की मुज़म्मत

इतनी नेमतों के बावजूद अक्सर इंसान अल्लाह की नाफ़रमानी करके नाशुुक्री का सुबूत देते हैं। सच्चा शुक्र यह है कि हर नेमत को अल्लाह की फ़रमांबरदारी में इस्तेमाल किया जाए।

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