Transliteration: (Allaahul lazee ja'ala lakumul laila littaskunoo feehi wannahaara mubsiraa; innal laaha lazoo fadlin 'alan naasi wa laakinna aksaran naasi laa yashkuroon)
"अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ ही है जिसने तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ लिठरात बनाई ताकि तà¥à¤® उसमें आराम पाओ [154], और दिन को देखने वाला (रोशन) बनाया [155]; बेशक अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ लोगों पर बड़ा फ़ज़à¥à¤² फ़रमाने वाला है [156], लेकिन अकà¥à¤¸à¤° लोग नाशà¥à¥à¤•à¥à¤°à¥€ करते हैं [157] ।"
अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला ने रात को अंधेरी और पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ून बनाया ताकि जिसà¥à¤®à¤¾à¤¨à¥€ और रूहानी थकान दूर हो। रात का पहला हिसà¥à¤¸à¤¾ नींद और आराम के लिठहै, और पिछला हिसà¥à¤¸à¤¾ इबादत, तहाजà¥à¤œà¥à¤¦ और मà¥à¤¨à¤¾à¤œà¤¾à¤¤-à¤-इलाही के लिठबेहतरीन वक़à¥à¤¤ है।
दिन को रौशन फ़रमाया ताकि इंसान अपने काम-काज, रिज़à¥à¤•़ की तलाश और दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤µà¥€ व दीनी उमूर बा-आसानी अंजाम दे सके।
ज़िंदगी, सेहत, वक़à¥à¤¤ और रिज़à¥à¤•़ सब अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ का मà¥à¤«à¤¼à¥à¤¤ फ़ज़à¥à¤² व à¤à¤¹à¤¸à¤¾à¤¨ हैं।
इतनी नेमतों के बावजूद अकà¥à¤¸à¤° इंसान अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ की नाफ़रमानी करके नाशà¥à¥à¤•à¥à¤°à¥€ का सà¥à¤¬à¥‚त देते हैं। सचà¥à¤šà¤¾ शà¥à¤•à¥à¤° यह है कि हर नेमत को अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ की फ़रमांबरदारी में इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाà¤à¥¤
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