कुरान - 40:60 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

60
وَقَالَ رَبُّكُمُ ٱدۡعُونِيٓ أَسۡتَجِبۡ لَكُمۡۚ إِنَّ ٱلَّذِينَ يَسۡتَكۡبِرُونَ عَنۡ عِبَادَتِي سَيَدۡخُلُونَ جَهَنَّمَ دَاخِرِينَ

Transliteration: (Wa qaala Rabbukumud 'ooneee astajib lakum; innal lazeena yastakbiroona an 'ibaadatee sa yadkhuloona jahannama daakhireen (Section 6))

और तुम्हारे रब ने फ़रमाया: 'मुझसे दुआ करो, मैं तुम्हारी दुआ क़बूल फ़रमाऊँगा [151]; बेशक जो लोग मेरी इबादत से तकब्बुर करते हैं [152], वे अनक़रीब जहन्नम में दाख़िल होंगे ज़लील होकर [153] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 60 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 60

"और तुम्हारे रब ने फ़रमाया: 'मुझसे दुआ करो, मैं तुम्हारी दुआ क़बूल फ़रमाऊँगा [151]; बेशक जो लोग मेरी इबादत से तकब्बुर करते हैं [152], वे अनक़रीब जहन्नम में दाख़िल होंगे ज़लील होकर [153] ।'"

[151] 'उद्ऊनी अस्तजिब लकुम'—दुआ और क़बूलियत का वा'दा

अल्लाह तआला ने बंदों को हुक्म दिया कि वे अपनी हर हाजत के लिए उसी से दुआ मांगें, और उसने क़बूलियत का सच्चा वा'दा फ़रमाया है। हदीस शरीफ़ में फ़रमाया गया: 'अद-दुआउ हुवल-इबादह' (दुआ ही असल इबादत है)।

[152] इबादत व दुआ से तकब्बुर की मुज़म्मत

जो लोग ग़ुरूर में आकर अल्लाह से नहीं मांगते या उसकी इबादत को अपनी शान के ख़िलाफ़ समझते हैं, अल्लाह उनसे सख़्त नाराज़ होता है।

[153] दोज़ख़ में ज़िल्लत-आमेज़ दाख़िला

मुतकब्बिरों और मुशरिकों को जहन्नम में ज़लील व रुसवा करके डाला जाएगा।

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