कुरान - 40:57 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

57
لَخَلۡقُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ أَكۡبَرُ مِنۡ خَلۡقِ ٱلنَّاسِ وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Lakhalqus samaawaati wal ardi akbaru min khalqin naasi wa laakinna aksaran naasi laa ya'lamoon)

बेशक आसमानों और ज़मीन का पैदा करना इंसानों के पैदा करने से कहीं बड़ा (काम) है [146], लेकिन अक्सर लोग नहीं जानते [147] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 57 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 57

"बेशक आसमानों और ज़मीन का पैदा करना इंसानों के पैदा करने से कहीं बड़ा (काम) है [146], लेकिन अक्सर लोग नहीं जानते [147] ।"

[146] कायनात की अज़ीम तख़लीक़ से दोबारा जी उठने का सबूत

जिस अल्लाह ने इतने अज़ीम आसमानों, सितारों और ज़मीन को पहली बार पैदा फ़रमाया, उसके लिए इंसान को मरने के बाद दोबारा ज़िंदा कर देना क्या मुश्किल है! अल्लाह के लिए हर चीज़ 'कुन' फ़रमाते ही हो जाती है।

[147] मुनकिरीन की बे-अक़्ली

अक्सर काफ़िर इस खुली अक़्ली दलील पर ग़ौर नहीं करते और हश्र-ओ-नश्र का इनकार करते हैं।

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