कुरान - 11:101 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

101
وَمَا ظَلَمۡنَٰهُمۡ وَلَٰكِن ظَلَمُوٓاْ أَنفُسَهُمۡۖ فَمَآ أَغۡنَتۡ عَنۡهُمۡ ءَالِهَتُهُمُ ٱلَّتِي يَدۡعُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ مِن شَيۡءٖ لَّمَّا جَآءَ أَمۡرُ رَبِّكَۖ وَمَا زَادُوهُمۡ غَيۡرَ تَتۡبِيبٖ

Transliteration: (Wa maa zalamnaahum wa laakin zalamooo anfusahum famaaa aghnat 'anhum aalihatuhumul latee yad'oona min doonil laahi min shai'il lammaa jaaa'a amru Rabbika wa maa zaadoohum ghaira tatbeeb)

और हमने उन पर कोई ज़ुल्म नहीं किया, बल्कि उन्होंने ख़ुद अपनी जानों पर ज़ुल्म किया था। पस उनके वे माबूद जिन्हें वे अल्लाह को छोड़कर पुकारते थे [202], जब आपके रब का हुक्म आ गया तो उनके कुछ काम न आए, और उन्होंने बर्बादी के सिवा उनके हक़ में कुछ न बढ़ाया [203]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 101 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 101 की तफ़्सीर

✅ [202] बातिल माबूदों की बेबसी

काफ़िर जिन बुतों और झूठे देवताओं की पूजा करते थे, अज़ाब के वक़्त वे उन्हें कोई नफ़ा न पहुँचा सके और न ही अल्लाह की पकड़ से बचा सके।

✅ [203] बातिल की पैरवी का अंजाम

ग़ैर-अल्लाह की इबादत और बे-दीनों का साथ इंसान को हलाकत, बर्बादी और ख़सारे के सिवा कुछ नहीं देता।

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