कुरान - 11:102 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

102
وَكَذَٰلِكَ أَخۡذُ رَبِّكَ إِذَآ أَخَذَ ٱلۡقُرَىٰ وَهِيَ ظَٰلِمَةٌۚ إِنَّ أَخۡذَهُۥٓ أَلِيمٞ شَدِيدٌ

Transliteration: (Wa kazaalika akhzu Rabbika izaaa akhazal quraa wa hiya zaalimah; inna akhzahooo aleemun shadeed)

और आपके रब की पकड़ ऐसी ही होती है जब वह बस्तियों को पकड़ता है जबकि वे ज़ालिम हों [204]। बेशक उसकी पकड़ दर्दनाक और बड़ी सख़्त है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 102 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 102 की तफ़्सीर

✅ [204] ज़ालिमों पर अज़ाबे इलाही की पकड़

अल्लाह तआला ज़ालिमों को मुहलत ज़रूर देता है, लेकिन जब अपनी नाफ़रमानी और ज़ुल्म की इंतिहा पर वे बाज़ नहीं आते तो उसकी गिरफ़्त ऐसी दर्दनाक और सख़्त होती है जिससे कोई बच नहीं सकता।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now