कुरान - 11:103 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

103
إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗ لِّمَنۡ خَافَ عَذَابَ ٱلۡأٓخِرَةِۚ ذَٰلِكَ يَوۡمٞ مَّجۡمُوعٞ لَّهُ ٱلنَّاسُ وَذَٰلِكَ يَوۡمٞ مَّشۡهُودٞ

Transliteration: (Inna fee zaalika la aayatal liman khaafa 'azaabal Aakhirah; zaalika Yawmum majmoo'ul lahun naasu wa zaalika Yawmum mashhood)

बेशक इसमें उस शख़्स के लिए बड़ी निशानी है जो आख़िरत के अज़ाब से डरे [205]। वह ऐसा दिन है जिसमें सब लोग जमा किए जाएंगे, और वह ऐसा दिन है जिसमें सब हाज़िर किए जाएंगे [206]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 103 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 103 की तफ़्सीर

✅ [205] ख़ौफ़े आख़िरत और इब्रत

इन पिछली उम्मतों की तबाही में उन लोगों के लिए अज़ीम सबक़ है जिनके दिलों में आख़िरत की जवाबदेही का ख़ौफ़ है।

✅ [206] यौमुल महशर: हाज़िरी का दिन

क़ियामत वह दिन है जिसमें अव्वलीन व आख़िरीन सबको एक मैदान में जमा किया जाएगा और हर इंसान के आमाल सबकी नज़रों के सामने पेश किए जाएंगे।

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