कुरान - 11:105 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

105
يَوۡمَ يَأۡتِ لَا تَكَلَّمُ نَفۡسٌ إِلَّا بِإِذۡنِهِۦۚ فَمِنۡهُمۡ شَقِيّٞ وَسَعِيدٞ

Transliteration: (Yawma yaati laa takallamu nafsun illaa bi iznih; faminhum shaqiyyunw wa sa'eed)

जिस दिन वह आएगा, तो कोई जान उसकी इजाज़त के बग़ैर बात भी न कर सकेगी। फिर उनमें से कुछ बदबख़्त होंगे [207] और कुछ नेकबख़्त (सौभाग्यशाली) [208]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 105 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 105 की तफ़्सीर

✅ [207] इज़्ने इलाही के बग़ैर कलाम की मुमानअत

क़ियामत की हौलनाकी और अल्लाह के जलाल के सामने किसी को इजाज़त के बग़ैर लब हिलाने की हिम्मत न होगी।

✅ [208] शक़ी (बदबख़्त) और सईद (नेकबख़्त)

लोग दो गिरोहों में बंट जाएंगे: बदबख़्त वे जो कुफ़्र व गुनाह पर मरे, और नेकबख़्त वे जो ईमान व अमल पर साबित क़दम रहे।

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