कुरान - 11:107 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

107
خَٰلِدِينَ فِيهَا مَا دَامَتِ ٱلسَّمَٰوَٰتُ وَٱلۡأَرۡضُ إِلَّا مَا شَآءَ رَبُّكَۚ إِنَّ رَبَّكَ فَعَّالٞ لِّمَا يُرِيدُ

Transliteration: (Khaalideena feehaa maa daamatis samaawaatu wal ardu illaa maa shaaa'a Rabbuk; inna Rabbaka fa' 'aalul limaa yureed)

वे उसमें हमेशा रहेंगे जब तक कि आसमान और ज़मीन क़ायम रहें, सिवाय इसके जो आपका रब चाहे [210]। बेशक आपका रब जो चाहता है, पूरा करके रहता है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 107 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 107 की तफ़्सीर

✅ [210] दोज़ख़ में दवाम और मबनी-बर-हिकमत इस्तेस्ना

काफ़िरों के लिए दोज़ख़ का अज़ाब हमेशा-हमेशा के लिए है। 'जब तक आसमान और ज़मीन क़ायम रहें' अरबों के मुहावरे में हमेशा रहने के लिए बोला जाता है, या इससे मुराद आख़िरत के आसमान व ज़मीन हैं। 'इल्ला मा शा-अ रब्बुक' से अहले सुन्नत का मौक़िफ़ है कि गुनाहगार मोमिनीन को अल्लाह अपनी रहमत और शफ़ाअत से जहन्नम से निकाल कर जन्नत में दाख़िल फ़रमाएगा।

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