कुरान - 11:109 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

109
فَلَا تَكُ فِي مِرۡيَةٖ مِّمَّا يَعۡبُدُ هَـٰٓؤُلَآءِۚ مَا يَعۡبُدُونَ إِلَّا كَمَا يَعۡبُدُ ءَابَآؤُهُم مِّن قَبۡلُۚ وَإِنَّا لَمُوَفُّوهُمۡ نَصِيبَهُمۡ غَيۡرَ مَنقُوصٖ

Transliteration: (Falaa taku fee miryatim mimmmaa ya'budu haaa'ulaaa'; maa ya'budoona illaa kamaa ya'budu aabaaa'uhum min qabl; wa innaa lamuwaf foohum naseebahum ghaira manqoos)

पस आप उनके इस बातिल दीन के बारे में किसी शक में न रहें जिसे ये लोग पूजते हैं [213]। ये तो उसी तरह पूजते हैं जैसे इनसे पहले इनके बाप-दादा पूजते थे। और बेशक हम उन्हें उनका पूरा हिस्सा बग़ैर किसी कमी के देने वाले हैं [214]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 109 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 109 की तफ़्सीर

✅ [213] बातिल परस्ती की हक़ीक़त

मुशरिकीन के पास अपने शिर्क की कोई अक़्ली या नक़्ली दलील नहीं, सिर्फ़ बाप-दादा की अंधी तक़लीद है।

✅ [214] अज़ाब का पूरा हिस्सा

अल्लाह तआला मुनकिरीन को उनके कुफ़्र का पूरा अज़ाब बिना किसी कमी के भुगताएगा।

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