कुरान - 11:110 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

110
وَلَقَدۡ ءَاتَيۡنَا مُوسَى ٱلۡكِتَٰبَ فَٱخۡتُلِفَ فِيهِۚ وَلَوۡلَا كَلِمَةٞ سَبَقَتۡ مِن رَّبِّكَ لَقُضِيَ بَيۡنَهُمۡۚ وَإِنَّهُمۡ لَفِي شَكّٖ مِّنۡهُ مُرِيبٖ

Transliteration: (Wa laqad aatainaa Moosal Kitaaba fakhtulifa feeh; wa law laa Kalimatun sabaqat mir Rabbika laqudiya bainahum; wa innahum lafee shakkim minhu mureeb)

और बेशक हमने मूसा को किताब (तौरात) दी [215], तो उसमें भी इख़्तिलाफ़ किया गया। और अगर आपके रब की तरफ़ से एक बात पहले से तय न हो चुकी होती, तो उनके दरमियान फ़ैसला कर दिया गया होता। और बेशक वे इसके बारे में ऐसे शक में हैं जिसने उन्हें उलझन में डाल रखा है [216]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 110 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 110 की तफ़्सीर

✅ [215] हज़रत मूसा (अलै.) को किताब का अता होना

जैसे हज़रत मूसा (अलै.) की क़ौम ने तौरात में इख़्तिलाफ़ और तब्दीली की, वैसे ही अहले मक्का क़ुरआन का इनकार कर रहे हैं; रसूलुल्लाह ﷺ को तसल्ली दी गई।

✅ [216] फ़ैसले की ताख़ीर

अगर अल्लाह ने क़ियामत के दिन फ़ैसले का वादा न फ़रमाया होता तो दुनिया ही में उनका फ़ैसला चुका दिया जाता।

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