कुरान - 11:112 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

112
فَٱسۡتَقِمۡ كَمَآ أُمِرۡتَ وَمَن تَابَ مَعَكَ وَلَا تَطۡغَوۡاْۚ إِنَّهُۥ بِمَا تَعۡمَلُونَ بَصِيرٞ

Transliteration: (Fastaqim kamaaa umirta wa man taaba ma'aka wa laa tatghaw; innahoo bimaa ta'maloona Baseer)

पस आप क़ायम रहिए जैसा कि आपको हुक्म दिया गया है, और वे भी जो आपके साथ तौबा कर चुके हैं [218]; और हद से न बढ़ो। बेशक वह तुम्हारे तमाम कामों को देख रहा है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 112 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 112 की तफ़्सीर

✅ [218] इस्ंतिक़ामत (दृढ़ता) का अज़ीम हुक्म

हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ ने फ़रमाया कि मुझे सूरा हूद और उसकी जैसी सूरतों ने बूढ़ा कर दिया, क्योंकि इसमें 'फ़स्तक़िम कमा उमिरत' (पस हुक्म के मुताबिक़ साबित क़दम रहिए) का निहायत नाज़ुक और अज़ीम हुक्म आया है। शरीअत और हक़ पर पूरी ज़िन्दगी क़ायम रहना और हद से न तजावुज़ करना ही असल कामियाबी है।

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