कुरान - 11:114 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

114
وَأَقِمِ ٱلصَّلَوٰةَ طَرَفَيِ ٱلنَّهَارِ وَزُلَفٗا مِّنَ ٱلَّيۡلِۚ إِنَّ ٱلۡحَسَنَٰتِ يُذۡهِبۡنَ ٱلسَّيِّـَٔاتِۚ ذَٰلِكَ ذِكۡرَىٰ لِلذَّـٰكِرِينَ

Transliteration: (Wa aqimis Salaata tarafayin nahaari wa zulafam minal layl; innal hasanaati yuzhibnas saiyi aat; zaalika zikraa liz zaakireen)

और दिन के दोनों सिरों पर और रात के कुछ हिस्सों में नमाज़ क़ायम कीजिए [221]। बेशक नेकियां बुराइयों को मिटा देती हैं [222]। यह नसीहत पकड़ने वालों के लिए एक बड़ी नसीहत है [223]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 114 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 114 की तफ़्सीर

✅ [221] पांचों नमाज़ों के औक़ात

दिन के दोनों सिरों से मुराद फ़ज्र, ज़ुहर और अस्र की नमाज़ें हैं, और रात के हिस्सों से मुराद मग़रिब और इशा की नमाज़ें हैं। नमाज़ दीन का सुतून है।

✅ [222] नेकियों से गुनाहों का कफ़्फ़ारा

रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया कि पांचों वक़्त की नमाज़ें और जुमा छोटे गुनाहों को ऐसे धो देते हैं जैसे पानी मैल-कुचैल को साफ़ कर देता है।

✅ [223] अहले ज़िक्र के लिए नसीहत

यह उन लोगों के लिए बेहतरीन सबक़ है जो अल्लाह की याद में दिल लगाते हैं।

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