Transliteration: (Wa aqimis Salaata tarafayin nahaari wa zulafam minal layl; innal hasanaati yuzhibnas saiyi aat; zaalika zikraa liz zaakireen)
दिन के दोनों सिरों से मुराद फ़ज्र, ज़ुहर और अस्र की नमाज़ें हैं, और रात के हिस्सों से मुराद मग़रिब और इशा की नमाज़ें हैं। नमाज़ दीन का सुतून है।
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया कि पांचों वक़्त की नमाज़ें और जुमा छोटे गुनाहों को ऐसे धो देते हैं जैसे पानी मैल-कुचैल को साफ़ कर देता है।
यह उन लोगों के लिए बेहतरीन सबक़ है जो अल्लाह की याद में दिल लगाते हैं।
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