कुरान - 11:116 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

116
فَلَوۡلَا كَانَ مِنَ ٱلۡقُرُونِ مِن قَبۡلِكُمۡ أُوْلُواْ بَقِيَّةٖ يَنۡهَوۡنَ عَنِ ٱلۡفَسَادِ فِي ٱلۡأَرۡضِ إِلَّا قَلِيلٗا مِّمَّنۡ أَنجَيۡنَا مِنۡهُمۡۗ وَٱتَّبَعَ ٱلَّذِينَ ظَلَمُواْ مَآ أُتۡرِفُواْ فِيهِ وَكَانُواْ مُجۡرِمِينَ

Transliteration: (Falaw laa kaana minal qurooni min qablikum ooloo baqiyyatiny yanhawna 'anil fasaadi fil ardi illaa qaleelam mimman anjainaa minhum; wattaba'al lazeena zalamoo maaa utrifoo feehi wa kaanoo mujrimeen)

फिर तुम से पहले की क़ौमों में ऐसे भले लोग क्यों न हुए [225] जो ज़मीन में फ़साद फैलाने से रोकते? सिवाय चन्द लोगों के जिन्हें हमने उनमें से बचा लिया। और ज़ालिम लोग उसी ऐश-ओ-आराम के पीछे पड़े रहे जो उन्हें दिया गया था [226], और वे मुजरिम ही थे [227]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 116 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 116 की तफ़्सीर

✅ [225] अम्र बिल-मारूफ़ करने वाले बा-किरदार लोग

पिछली उम्मतें इसलिए तबाह हुईं कि उनमें बुराई से रोकने वाले और हक़ की आवाज़ उठाने वाले नेक उलेमा और रहनुमा बहुत कम रह गए थे।

✅ [226] ऐशो-इशरत की तबाही

दौलतमंद और मुतकब्बिर लोग दुनियावी लज़्ज़तों में मस्त होकर अल्लाह के अहकाम भूल गए।

✅ [227] मुजरिमों का मुस्तहिक़-ए-अज़ाब होना

वे अपने जान-बूझकर किए गए गुनाहों की वजह से हलाकत के हक़दार बने।

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