कुरान - 11:117 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

117
وَمَا كَانَ رَبُّكَ لِيُهۡلِكَ ٱلۡقُرَىٰ بِظُلۡمٖ وَأَهۡلُهَا مُصۡلِحُونَ

Transliteration: (Wa maa kaana Rabbuka liyuhlikal quraa bizulminw wa ahluhaa muslihoon)

और आपका रब ऐसा नहीं कि बस्तियों को नाहक़ तबाह कर दे जबकि वहाँ के बाशिंदे सुधार करने वाले (नेक) हों [228]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 117 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 117 की तफ़्सीर

✅ [228] अदले इलाही और मुसलेहीन की बरकत

अल्लाह किसी बस्ती पर ज़ुल्मन अज़ाब नहीं भेजता। जब तक बस्ती में इस्लाह करने वाले, इंसाफ़ पसंद और हक़ पर क़ायम लोग मौजूद रहते हैं, अल्लाह का अज़ाब रुका रहता है।

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