कुरान - 11:115 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

115
وَٱصۡبِرۡ فَإِنَّ ٱللَّهَ لَا يُضِيعُ أَجۡرَ ٱلۡمُحۡسِنِينَ

Transliteration: (Wasbir fa innal laaha laa yudee'u ajral muhsineen)

और सब्र कीजिए, क्योंकि अल्लाह नेकी करने वालों का अज्र ज़ाया नहीं फ़रमाता [224]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 115 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 115 की तफ़्सीर

✅ [224] सब्र और एहसान का यक़ीनी अज्र

दीन की राह में पेश आने वाली तकलीफ़ों पर सब्र करना और इबादत में लगे रहना एहसान है, और अल्लाह मोहसिनीन के सवाब को कभी अकारत नहीं जाने देता।

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