कुरान - 11:113 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

113
وَلَا تَرۡكَنُوٓاْ إِلَى ٱلَّذِينَ ظَلَمُواْ فَتَمَسَّكُمُ ٱلنَّارُ وَمَا لَكُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ مِنۡ أَوۡلِيَآءَ ثُمَّ لَا تُنصَرُونَ

Transliteration: (Wa laa tarkanooo ilal lazeena zalamoo fatamassa kumun Naaru wa maa lakum min doonil laahi min awliyaaa'a summa laa tunsaroon)

और ज़ालिमों की तरफ़ ज़रा भी न झुकना [219], वरना तुम्हें भी आग छू लेगी, और अल्लाह के सिवा तुम्हारा कोई मददगार न होगा, फिर तुम्हारी कोई मदद न की जाएगी [220]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 113 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 113 की तफ़्सीर

✅ [219] ज़ालिमों व काफ़िरों से मेल-जोल की मुमानअत

'रुकून' से मुराद ज़ालिमों और दीन के दुश्मनों से दिली मुहब्बत रखना, उनके ज़ुल्म पर ख़ुश होना या उनके सामने चापलूसी करना है। मोमिन को बातिल से हमेशा बेज़ारी रखनी चाहिए।

✅ [220] ज़ालिमों की पैरवी का अज़ाब

जो ज़ालिमों का साथ देगा, वह जहन्नम की आग का हक़दार होगा और उसे अल्लाह के मुक़ाबले में कोई बचाने वाला न मिलेगा।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now