कुरान - 11:118 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

118
وَلَوۡ شَآءَ رَبُّكَ لَجَعَلَ ٱلنَّاسَ أُمَّةٗ وَٰحِدَةٗۖ وَلَا يَزَالُونَ مُخۡتَلِفِينَ

Transliteration: (Wa law shaaa'a Rabbuka laja'alannnaasa ummatanw waa hidatanw wa laa yazaaloona mukhtalifeen)

और अगर आपका रब चाहता तो तमाम इंसानों को एक ही उम्मत बना देता, लेकिन वे हमेशा इख़्तिलाफ़ ही करते रहेंगे [229]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 118 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 118 की तफ़्सीर

✅ [229] इंसानी इख़्तिलाफ़ और आज़माइश

अल्लाह अगर चाहता तो सबको ज़बरदस्ती हिदायत पर मजबूर कर देता, लेकिन उसने इंसान को अक़्ल और इख़्तियार देकर आज़माया है, चुनांचे अपनी ख़्वाहिशात की पैरवी में लोग मुख़्तलिफ़ बातिल राहों पर चलते रहेंगे।

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