कुरान - 11:11 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

11
إِلَّا ٱلَّذِينَ صَبَرُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّـٰلِحَٰتِ أُوْلَـٰٓئِكَ لَهُم مَّغۡفِرَةٞ وَأَجۡرٞ كَبِيرٞ

Transliteration: (Illal lazeena sabaroo wa 'amilus saalihaati ulaaa'ika lahum maghfiratunw wa ajrun kabeer)

सिवाय उन लोगों के जो सब्र करते हैं [24] और नेक आमाल करते हैं। उन्हीं के लिए मग़फ़िरत (माफ़ी) और बड़ा अज्र (सवाब) है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 11 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 11 की तफ़्सीर

✅ [24] सब्र और नेक आमाल की अहमियत

यह आयत राहत और मुसीबत दोनों हालतों में सब्र और साबित-क़दमी की अहमियत को उजागर करती है। जो लोग तंगी में सब्र करते हैं और नेअमत में शुक्र व नेक अमल करते हैं, वे ही मग़फ़िरत और अज़ीम सवाब के हक़दार हैं।

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