कुरान - 11:10 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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وَلَئِنۡ أَذَقۡنَٰهُ نَعۡمَآءَ بَعۡدَ ضَرَّآءَ مَسَّتۡهُ لَيَقُولَنَّ ذَهَبَ ٱلسَّيِّـَٔاتُ عَنِّيٓۚ إِنَّهُۥ لَفَرِحٞ فَخُورٌ

Transliteration: (Wala'in azaqnaahu na'maaa'a ba'da darraaa'a massat hu la yaqoolanna zahabas saiyiaatu 'anneee; innahoo lafarihun fakhoor)

और अगर हम तंगी व तकलीफ़ पहुंचने के बाद उसे नेअमत का मज़ा चखाएं, तो वह ज़रूर कहेगा [22], 'मुझसे सारी मुसीबतें दूर हो गईं।' बेशक वह बड़ा इतराने वाला और डींग मारने वाला है [23]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 10 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 10 की तफ़्सीर

✅ [22] राहत मिलने पर ग़फ़लत

तकलीफ़ के बाद आसानी पाने पर ग़ाफ़िल इंसान अल्लाह का शुक्र अदा करने के बजाय यह समझ बैठता है कि अब कभी कोई मुसीबत नहीं आएगी और अपने ज़ाती कमाल का नतीजा समझता है।

✅ [23] तकब्बुर और शेख़ी की मुमानअत

इस्लाम में तकब्बुर से ख़ुशी मनाना और लोगों पर बड़ाई जताना हराम है। नेअमत मिलने पर आजिज़ बनकर अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए न कि फ़ख़्र व ग़ुरूर।

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