Transliteration: (Fala'allaka taarikum ba'da maa yoohaaa ilaika wa daaa'iqum bihee sadruka ai yaqooloo law laaa unzila 'alaihi kanzun aw jaaa'a ma'ahoo malak; innamaa anta nazeer; wallaahu 'alaa kulli shai'inw wakeel)
आयत का अंदाज़े बयान नबी करीम ﷺ को तसल्ली देने के लिए है कि आप उनके बेतुके मुतालिबात से रंजीदा न हों; आपने अल्लाह का पैग़ाम पूरी अमानतदारी से पहुंचाया है।
यह आयत अब्दुल्लाह बिन उमय्या जैसे मुशरिकीन के सवालात के जवाब में नाज़िल हुई जिन्होंने नबी करीम ﷺ से ख़ज़ाने या फ़रिश्तों को देखने की मांग की थी।
काफ़िरों की मांगें महज़ ज़ाहिरी और दुनियावी तमाशे पर मबनी थीं, जबकि नबी की हक़ीक़ी ताक़त मोजिज़ाते क़ुरआन और रूहानी हिदायत है।
नबी का काम ज़बरदस्ती मनवाना या उनके कहे मुताबिक़ करतब दिखाना नहीं, बल्कि हक़ की राह दिखाना और बुरे अंजाम से आगाह करना है।
तमाम मामलात अल्लाह के हाथ में हैं; वह अपनी हिकमत के मुताबिक़ फ़ैसले फ़रमाता है और किसी के मुतालिबे का पाबंद नहीं।
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