कुरान - 11:12 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

12
فَلَعَلَّكَ تَارِكُۢ بَعۡضَ مَا يُوحَىٰٓ إِلَيۡكَ وَضَآئِقُۢ بِهِۦ صَدۡرُكَ أَن يَقُولُواْ لَوۡلَآ أُنزِلَ عَلَيۡهِ كَنزٌ أَوۡ جَآءَ مَعَهُۥ مَلَكٌۚ إِنَّمَآ أَنتَ نَذِيرٞۚ وَٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ وَكِيلٌ

Transliteration: (Fala'allaka taarikum ba'da maa yoohaaa ilaika wa daaa'iqum bihee sadruka ai yaqooloo law laaa unzila 'alaihi kanzun aw jaaa'a ma'ahoo malak; innamaa anta nazeer; wallaahu 'alaa kulli shai'inw wakeel)

तो शायद आप उस वह्य में से कुछ छोड़ दें जो आपकी तरफ़ भेजी जाती है और इस बात से आपका सीना तंग हो, क्योंकि वे कहते हैं, 'उन पर कोई ख़ज़ाना क्यों नहीं उतारा गया या उनके साथ कोई फ़रिश्ता क्यों नहीं आया?' आप तो सिर्फ़ डराने वाले हैं [28], और अल्लाह हर चीज़ पर निगहबान है [29]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 12 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 12 की तफ़्सीर

✅ [25] नबी करीम ﷺ की कामिल तबलीग़

आयत का अंदाज़े बयान नबी करीम ﷺ को तसल्ली देने के लिए है कि आप उनके बेतुके मुतालिबात से रंजीदा न हों; आपने अल्लाह का पैग़ाम पूरी अमानतदारी से पहुंचाया है।

✅ [26] शाने नुज़ूल

यह आयत अब्दुल्लाह बिन उमय्या जैसे मुशरिकीन के सवालात के जवाब में नाज़िल हुई जिन्होंने नबी करीम ﷺ से ख़ज़ाने या फ़रिश्तों को देखने की मांग की थी।

✅ [27] बातिल मुतालबात की हक़ीक़त

काफ़िरों की मांगें महज़ ज़ाहिरी और दुनियावी तमाशे पर मबनी थीं, जबकि नबी की हक़ीक़ी ताक़त मोजिज़ाते क़ुरआन और रूहानी हिदायत है।

✅ [28] रसूल की ज़िम्मेदारी सिर्फ़ डराना और पहुंचाना है

नबी का काम ज़बरदस्ती मनवाना या उनके कहे मुताबिक़ करतब दिखाना नहीं, बल्कि हक़ की राह दिखाना और बुरे अंजाम से आगाह करना है।

✅ [29] अल्लाह का हर चीज़ पर कारसाज़ होना

तमाम मामलात अल्लाह के हाथ में हैं; वह अपनी हिकमत के मुताबिक़ फ़ैसले फ़रमाता है और किसी के मुतालिबे का पाबंद नहीं।

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