कुरान - 11:14 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

14
فَإِلَّمۡ يَسۡتَجِيبُواْ لَكُمۡ فَٱعۡلَمُوٓاْ أَنَّمَآ أُنزِلَ بِعِلۡمِ ٱللَّهِ وَأَن لَّآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَۖ فَهَلۡ أَنتُم مُّسۡلِمُونَ

Transliteration: (Fa il lam yastajeeboo lakum fa'lamooo annamaaa unzilla bi'ilmil laahi wa al laaa ilaaha illaa Huwa fahal antum muslimoon)

फिर अगर वे [33] तुम्हारा जवाब न दे सकें, तो जान लो कि यह अल्लाह के इल्म के साथ नाज़िल हुआ है [34], और यह कि उसके सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं। तो क्या अब तुम इस्लाम क़ुबूल करते हो? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 14 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 14 की तफ़्सीर

✅ [33] मुनकिरीन की आजिज़ी

जब मुशरिकीन क़ुरआन की मिसाल लाने से पूरी तरह आजिज़ आ गए, तो यह साबित हो गया कि यह किसी इंसान की कोशिश नहीं बल्कि रब्बे कायनात का कलाम है।

✅ [34] इल्मे इलाही से नुज़ूल

क़ुरआन अल्लाह के ला-महदूद इल्म से नाज़िल हुआ है; इसमें जो अहकाम और हिकमतें हैं वे सिर्फ़ अल्लाह ही की तरफ़ से हो सकती हैं, इसलिए तौहीद के आगे सर झुका दो।

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