कुरान - 11:16 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

16
أُوْلَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ لَيۡسَ لَهُمۡ فِي ٱلۡأٓخِرَةِ إِلَّا ٱلنَّارُۖ وَحَبِطَ مَا صَنَعُواْ فِيهَا وَبَٰطِلٞ مَّا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ

Transliteration: (Ulaaa'ikal lazeena laisa lahum fil Aakhirati illan Naaru wa habita maa sana'oo feehaa wa baatilum maa kaanoo ya'maloon)

ये वे लोग हैं जिनके लिए आख़िरत में आग के सिवा कुछ नहीं [36]। और जो कुछ उन्होंने दुनिया में किया था वह सब बर्बाद हो गया, और उनके सारे आमाल बातिल (अकारथ) हो गए [37]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 16 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 16 की तफ़्सीर

✅ [36] आख़िरत में काफ़िरों की बे-नसीबी

चूंकि उन्होंने आख़िरत की नीयत ही नहीं की थी और ईमान से महरूम रहे, इसलिए आख़िरत की अदालत में उनका कोई हिस्सा बाक़ी नहीं रहता और उनके लिए सिर्फ़ जहन्नम की आग है।

✅ [37] ईमान आमाल की क़बूलियत की शर्त है

यह आयत बुनियादी उसूल बताती है कि ईमान के बग़ैर कोई भी नेक अमल आख़िरत में क़ाबिले क़बूल नहीं होता; कुफ़्र सारे आमाल को अकारथ कर देता है।

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