कुरान - 11:18 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

18
وَمَنۡ أَظۡلَمُ مِمَّنِ ٱفۡتَرَىٰ عَلَى ٱللَّهِ كَذِبًاۚ أُوْلَـٰٓئِكَ يُعۡرَضُونَ عَلَىٰ رَبِّهِمۡ وَيَقُولُ ٱلۡأَشۡهَٰدُ هَـٰٓؤُلَآءِ ٱلَّذِينَ كَذَبُواْ عَلَىٰ رَبِّهِمۡۚ أَلَا لَعۡنَةُ ٱللَّهِ عَلَى ٱلظَّـٰلِمِينَ

Transliteration: (Wa man azlamu mimmanif taraa 'alal laahi kazibaa; ulaaa'ika yu'radoona 'alaa Rabbihim wa yaqoolul ashhaa duhaaa'ulaaa'il lazeena kazaboo 'alaa Rabbihim; alaa la'natul laahi alaz zaalimeen)

और उस शख़्स से बड़ा ज़ालिम कौन होगा जो अल्लाह पर झूठा बोहतान बांधे [42]? वे अपने रब के सामने पेश किए जाएंगे, और गवाह कहेंगे [43], 'ये वे लोग हैं जिन्होंने अपने रब पर झूठ बांधा था [44]।' सुन लो! ज़ालिमों पर अल्लाह की लानत है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 18 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 18 की तफ़्सीर

✅ [42] अल्लाह पर झूठ बांधने का अज़ीम जुर्म

अल्लाह की ज़ात के साथ शिर्क करना, उसके लिए औलाद ठहराना या अपनी तरफ़ से अहकाम घड़कर अल्लाह की तरफ़ मंसूब करना सबसे बड़ा ज़ुल्म है।

✅ [43] क़ियामत के दिन गवाहों की गवाही

क़ियामत के दिन अम्बिया, फ़रिश्ते और मोमिन गवाही देंगे और मुजरिमों के करतूतों को पूरी मख़लूक़ के सामने खोल कर रख देंगे।

✅ [44] काफ़िरों और मुनाफ़िक़ों की रुसवाई

मैदाने महशर में ज़ालिमों की रुसवाई होगी और हदीस के मुताबिक़ अल्लाह मोमिनों के ऐबों पर पर्दा डालेगा मगर मुनकिरीन व मुकज़्ज़िबीन को सरे-आम रुसवा फ़रमाएगा।

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