कुरान - 11:20 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

20
أُوْلَـٰٓئِكَ لَمۡ يَكُونُواْ مُعۡجِزِينَ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَمَا كَانَ لَهُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ مِنۡ أَوۡلِيَآءَۘ يُضَٰعَفُ لَهُمُ ٱلۡعَذَابُۚ مَا كَانُواْ يَسۡتَطِيعُونَ ٱلسَّمۡعَ وَمَا كَانُواْ يُبۡصِرُونَ

Transliteration: (Ulaaa'ika lam yakoonoo mu'jizeena fil ardi wa maa kaana lahum min doonil laahi min awliyaaa'; yudaa'afu lahumul 'azaab; maa kaanoo yastatee'oonas sam'a wa maa kaanoo yubsiroon)

वे ज़मीन में (अल्लाह को) आजिज़ करने वाले नहीं थे [46], और अल्लाह के सिवा [47] उनका कोई मददगार न था [48]। उनके लिए अज़ाब दोगुना कर दिया जाएगा [49]। वे न सुनने की ताक़त रखते थे [50] और न देख सकते थे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 20 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 20 की तफ़्सीर

✅ [46] मुनकिरीन अल्लाह के क़ब्ज़े में हैं

काफ़िर चाहे कितनी भी ताक़त जुटा लें, वे ज़मीन में अल्लाह की पकड़ से भाग नहीं सकते; वे हमेशा अल्लाह के क़ुदरत के दायरे में हैं।

✅ [47] अल्लाह से जुदाई

अल्लाह के मुक़ाबले में उनका कोई हामी और मददगार नहीं बन सकता जो उन्हें अज़ाब से बचा सके।

✅ [48] मोमिनों के हक़ीक़ी मददगार

अल्लाह ने मोमिनों के लिए नबी करीम ﷺ, फ़रिश्तों और नेक बंदों को शफ़ाअत और मदद का ज़रिया बनाया है, मगर काफ़िर इस रहमत से महरूम हैं।

✅ [49] दोहरा अज़ाब

जो ख़ुद गुमराह हुए और दूसरों को भी गुमराह किया, उन्हें दोहरी सज़ा दी जाएगी—एक अपनी गुमराही की और दूसरी दूसरों को भटकाने की।

✅ [50] हक़ सुनने और देखने से महरूमी

उन्होंने अपनी ज़िद और तअस्सुब से हक़ की आवाज़ सुनने और उसकी निशानियां देखने की सलाहियत को ज़ाया कर दिया था, इसलिए वे गूंगों और अंधों की मानिंद हो गए।

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