Transliteration: (Ulaaa'ika lam yakoonoo mu'jizeena fil ardi wa maa kaana lahum min doonil laahi min awliyaaa'; yudaa'afu lahumul 'azaab; maa kaanoo yastatee'oonas sam'a wa maa kaanoo yubsiroon)
काफ़िर चाहे कितनी भी ताक़त जुटा लें, वे ज़मीन में अल्लाह की पकड़ से भाग नहीं सकते; वे हमेशा अल्लाह के क़ुदरत के दायरे में हैं।
अल्लाह के मुक़ाबले में उनका कोई हामी और मददगार नहीं बन सकता जो उन्हें अज़ाब से बचा सके।
अल्लाह ने मोमिनों के लिए नबी करीम ﷺ, फ़रिश्तों और नेक बंदों को शफ़ाअत और मदद का ज़रिया बनाया है, मगर काफ़िर इस रहमत से महरूम हैं।
जो ख़ुद गुमराह हुए और दूसरों को भी गुमराह किया, उन्हें दोहरी सज़ा दी जाएगी—एक अपनी गुमराही की और दूसरी दूसरों को भटकाने की।
उन्होंने अपनी ज़िद और तअस्सुब से हक़ की आवाज़ सुनने और उसकी निशानियां देखने की सलाहियत को ज़ाया कर दिया था, इसलिए वे गूंगों और अंधों की मानिंद हो गए।
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