Transliteration: (Laa jarama annahum fil Aakhirati humul akhsaroon)
यह आयत वाज़ेह करती है कि अगरचे गुनाहगार मुसलमान भी क़ियामत में तकलीफ़ उठाएंगे, मगर उनका नुक़सान काफ़िरों जैसा नहीं है। काफ़िरों का नुक़सान हमेशा के लिए है जिसमें कोई निजात या रहमत नहीं होगी, जबकि गुनाहगार मोमिन बिल-आख़िर अल्लाह की रहमत और शफ़ाअत से अज़ाब से रिहाई पाएंगे। इसलिए सबसे बड़ा घाटा कुफ़्र करने वालों ही का है।
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