कुरान - 11:21 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

21
أُوْلَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ خَسِرُوٓاْ أَنفُسَهُمۡ وَضَلَّ عَنۡهُم مَّا كَانُواْ يَفۡتَرُونَ

Transliteration: (Ulaaa'ikal lazeena khasirooo anfusahum wa dalla 'anhum maa kaanoo yaftaroon)

ये वही लोग हैं जिन्होंने अपनी जानों को घाटे में डाला। और जो कुछ वे झूठ गढ़ा करते थे, वह सब उनसे गुम (गायब) हो गया [51]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 21 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 21 की तफ़्सीर

✅ [51] गढ़े हुए बातिल अक़ीदों की नाकामी

यह आयत उन काफ़िरों और मुशरिकीन के बारे में है जो बुतों की पूजा करते थे और यह गुमान रखते थे कि ये बुत उन्हें नफ़ा देंगे या उनकी शफ़ाअत करेंगे। लेकिन क़ियामत के दिन यह तमाम मनघड़ंत अक़ीदा बातिल साबित होगा और वे झूठे माबूद बेबस और बेअसर होकर ग़ायब हो जाएंगे, जिससे उनकी जानें मुकम्मल ख़सारे में पड़ जाएंगी।

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