कुरान - 11:24 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

24
۞مَثَلُ ٱلۡفَرِيقَيۡنِ كَٱلۡأَعۡمَىٰ وَٱلۡأَصَمِّ وَٱلۡبَصِيرِ وَٱلسَّمِيعِۚ هَلۡ يَسۡتَوِيَانِ مَثَلًاۚ أَفَلَا تَذَكَّرُونَ

Transliteration: (Masalul fareeqaini kal a'maa wal asammi walbaseeri wassamee'; hal yastawiyaani masalaa; afalaa tazakkaroon)

दोनों फ़रीक़ों (गिरोहों) की मिसाल ऐसी है जैसे अंधा और बहरा, और देखने वाला और सुनने वाला [54]। क्या ये दोनों हालत में बराबर हो सकते हैं [55]? तो क्या तुम नसीहत नहीं पकड़ते? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 24 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 24 की तफ़्सीर

✅ [54] अंधा-बहरा बनाम देखने और सुनने वाला

इस आयत में काफ़िर और मोमिन का मुक़ाबला किया गया है: काफ़िर हक़ को देखने से अंधा और हक़ की आवाज़ सुनने से बहरा है, जबकि मोमिन बसीरत और समझदारी से लैस होकर हक़ को देखता और क़बूल करता है।

✅ [55] दर्जात का खुला फ़र्क़

ज़ाहिरी तौर पर बहरा सुनने वाले जैसा और अंधा देखने वाले जैसा लग सकता है, मगर हक़ीक़त में दोनों बराबर नहीं हो सकते। इसी तरह बातिल परस्त कभी मोमिन के रुतबे और अंजाम की बराबरी नहीं कर सकता।

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