कुरान - 11:25 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

25
وَلَقَدۡ أَرۡسَلۡنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوۡمِهِۦٓ إِنِّي لَكُمۡ نَذِيرٞ مُّبِينٌ

Transliteration: (Wa laqad arsalnaa Noohan ilaa qawmihee innee lakum nazeerum mubeen)

और बेशक हमने नूह को उनकी क़ौम की तरफ़ भेजा (कि उन्होंने कहा), 'बेशक मैं [56] तुम्हारे लिए एक खुला डराने वाला हूँ [57]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 25 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 25 की तफ़्सीर

✅ [56] हज़रत नूह (अलै.) का मुबारक नाम

हज़रत नूह (अलै.) का नाम यशकुर या अब्दुल ग़फ़्फ़ार था, और अपनी क़ौम के ग़म व गिरिया-ओ-ज़ारी की वजह से आपका लक़ब 'नूह' पड़ा। आप आदम-ए-सानी (मानवता के दूसरे पिता) हैं।

✅ [57] खुले नज़ीर (डराने वाले) की हैसियत

आपकी बेअसत के वक़्त पूरी क़ौम शिर्क और बुतपरस्ती में डूबी हुई थी। आपने निहायत वाज़ेह और रौशन दलीलों के साथ उन्हें अल्लाह के ग़ज़ब और अज़ाब से आगाह फ़रमाया।

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