Transliteration: (Wa laqad arsalnaa Noohan ilaa qawmihee innee lakum nazeerum mubeen)
हज़रत नूह (अलै.) का नाम यशकुर या अब्दुल ग़फ़्फ़ार था, और अपनी क़ौम के ग़म व गिरिया-ओ-ज़ारी की वजह से आपका लक़ब 'नूह' पड़ा। आप आदम-ए-सानी (मानवता के दूसरे पिता) हैं।
आपकी बेअसत के वक़्त पूरी क़ौम शिर्क और बुतपरस्ती में डूबी हुई थी। आपने निहायत वाज़ेह और रौशन दलीलों के साथ उन्हें अल्लाह के ग़ज़ब और अज़ाब से आगाह फ़रमाया।
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