Transliteration: (Faqaalal mala ul lazeena kafaroo min qawmihee ma naraaka illaa basharam mislanaa wa maa naraakat taba'aka illal lazeena hum araazilunaa baadiyar raayi wa maa naraa lakum 'alainaa min fadlim bal nazunnukum kaazibeen)
मुशरिकीन का पहला एतिराज़ यह था कि आप हमारी तरह हाड़-मांस के इंसान हैं, तो हम आपकी पैरवी क्यों करें? वे जिहालत की वजह से यह न समझ सके कि अल्लाह की तरफ़ से मक़ामे नुबुव्वत इंसानों की रहनुमाई के लिए अज़ीम नेअमत है।
काफ़िरों ने नूह (अलै.) के सच्चे पैरोकारों को कमज़ोर और ग़रीब कहकर हक़ीर जाना। तकब्बुर का यह हमेशा से तरीक़ा रहा है कि वे दुनियावी माल व दौलत को बड़ाई का पैमाना समझते हैं।
अपनी अना और तकब्बुर के बाइस सरदारों ने नूह (अलै.) और उनके जानिसारों को झुठला दिया और अपनी बड़ाई के नशे में हक़ को क़बूल करने से इनकार कर दिया।
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