कुरान - 11:29 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

29
وَيَٰقَوۡمِ لَآ أَسۡـَٔلُكُمۡ عَلَيۡهِ مَالًاۖ إِنۡ أَجۡرِيَ إِلَّا عَلَى ٱللَّهِۚ وَمَآ أَنَا۠ بِطَارِدِ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْۚ إِنَّهُم مُّلَٰقُواْ رَبِّهِمۡ وَلَٰكِنِّيٓ أَرَىٰكُمۡ قَوۡمٗا تَجۡهَلُونَ

Transliteration: (Wa yaa qawmi laaa as'alukum 'alaihi maalan in ajriya illaa 'alal laah; wa maaa ana bitaaridil lazeena aamanoo; innahum mulaaqoo Rabbihim wa laakinneee araakum qawman tajhaloon)

और ऐ मेरी क़ौम! मैं इस पर तुमसे कोई माल नहीं मांगता। मेरा अज्र तो सिर्फ़ अल्लाह के ज़िम्मे है। और मैं ईमान लाने वालों को अपने पास से निकालने वाला नहीं हूँ; वे यक़ीनन अपने रब से मिलने वाले हैं। लेकिन मैं देख रहा हूँ कि तुम लोग जिहालत बरत रहे हो [66]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 29 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 29 की तफ़्सीर

✅ [64] तबलीग़ पर कोई दुनियावी उजरत नहीं

अम्बिया-ए-किराम का पैग़ाम बेग़रज़ होता है; वे हिदायत पहुंचाने के बदले कोई दुनियावी माल या फ़ायदा नहीं मांगते बल्कि उनका बदला सिर्फ़ अल्लाह के पास है।

✅ [65] ग़रीब मोमिनों को दूर करने की बेजा मांग

काफ़िर सरदार शर्त रखते थे कि इन ग़रीब और कमज़ोर मुसलमानों को अपनी मजलिस से हटा दो तब हम बात करेंगे, मगर नूह (अलै.) ने साफ़ फ़रमा दिया कि मोमिन अल्लाह के महबूब हैं, मैं उन्हें कभी दूर नहीं कर सकता।

✅ [66] जिहालत और ग़ुरूर

नूह (अलै.) ने फ़रमाया कि तुम लोग जाहिल हो जो इंसानों की क़द्र उनके ईमान के बजाय उनकी दौलत से आंकते हो।

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