Transliteration: (Qaala yaa qawmi ara'aitum in kuntu 'alaa baiyinatim mir Rabbee wa aataanee rahmatam min 'indihee fa'um miyat 'alaikum anulzimuku moohaa wa antum lahaa kaarihoon)
नुबुव्वत ज़ाती जद्दो-जहद या दुनियावी हैसियत से हासिल नहीं होती, बल्कि यह अल्लाह तआला का ख़ास फ़ज़्ल व करम है जिसे वह अपने मुंतख़ब बंदों को अता फ़रमाता है।
१. मोजिज़े का मक़सद: मोजिज़े का मक़सद दलील क़ायम करना है न कि ज़बरदस्ती ईमान मनवाना। अगर ज़बरदस्ती ईमान लाना मक़सूद होता तो अल्लाह सबको मजबूर कर देता, मगर इम्तिहान इख़्तियार में ही है।
२. दिल की आमादगी: ईमान उसी दिल में उतरता है जो नफ़रत और तकब्बुर से पाक हो; बुग्ज़ और ईमान कभी एक दिल में जमा नहीं हो सकते।
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