कुरान - 11:26 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

26
أَن لَّا تَعۡبُدُوٓاْ إِلَّا ٱللَّهَۖ إِنِّيٓ أَخَافُ عَلَيۡكُمۡ عَذَابَ يَوۡمٍ أَلِيمٖ

Transliteration: (Al laa ta'budooo illal laaha inneee akhaafu 'alaikum 'azaaba Yawmin aleem)

कि तुम अल्लाह के सिवा किसी की इबादत न करो [58]। बेशक मुझे तुम्हारे ऊपर एक दर्दनाक दिन के अज़ाब का ख़ौफ़ है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 26 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 26 की तफ़्सीर

✅ [58] सिर्फ़ एक अल्लाह की इबादत

यह आयत ईमान के बाद ख़ालिस तौहीद और सिर्फ़ अल्लाह की बंदगी का हुक्म देती है। नूह (अलै.) ने अपनी क़ौम को बुतों की पूजा छोड़ने और शिर्क के दर्दनाक अंजाम से बचने की पुरज़ोर ताकीद फ़रमाई।

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