कुरान - 11:13 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

13
أَمۡ يَقُولُونَ ٱفۡتَرَىٰهُۖ قُلۡ فَأۡتُواْ بِعَشۡرِ سُوَرٖ مِّثۡلِهِۦ مُفۡتَرَيَٰتٖ وَٱدۡعُواْ مَنِ ٱسۡتَطَعۡتُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ إِن كُنتُمۡ صَٰدِقِينَ

Transliteration: (Am yaqooloonaf taraahu qul faatoo bi'ashri Suwarim mislihee muftarayaatinw wad'oo manis tata'tum min doonil laahi in kuntum saadiqeen)

क्या वे कहते हैं कि 'उन्होंने इसे ख़ुद गढ़ लिया है'? कह दीजिए, 'तो तुम इसके जैसी गढ़ी हुई दस सूरहें ले आओ [30], और अल्लाह के सिवा जिसे बुला सको बुला लो [31], अगर तुम सच्चे हो [32]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 13 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 13 की तफ़्सीर

✅ [30] क़ुरआन जैसी दस सूरहें लाने का चैलेंज

जब मक्का के मुशरिकीन ने क़ुरआन को इंसानी कलाम कहा, तो अल्लाह ने उन्हें खुला चैलेंज दिया कि अगर यह इंसान का कलाम है तो तुम भी इसके जैसी सिर्फ़ दस सूरहें बनाकर दिखा दो।

✅ [31] क़ुरआन का एजाज़ और इलाही कलाम होना

इंसान दुनियावी ईजादात तो कर सकता है मगर क़ुरआन जैसी बेमिसाल बलाग़त, हिकमत और ग़ैब की ख़बरों से भरी एक आयत भी नहीं बना सकता।

✅ [32] 'अल्लाह के सिवा' की मुराद

यानी अपने तमाम बुतों, शायरों, काहिनों और मददगारों को बुला लो; पूरी दुनिया मिलकर भी क़ुरआन का मुक़ाबला नहीं कर सकती।

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