Transliteration: (Am yaqooloonaf taraahu qul faatoo bi'ashri Suwarim mislihee muftarayaatinw wad'oo manis tata'tum min doonil laahi in kuntum saadiqeen)
जब मक्का के मुशरिकीन ने क़ुरआन को इंसानी कलाम कहा, तो अल्लाह ने उन्हें खुला चैलेंज दिया कि अगर यह इंसान का कलाम है तो तुम भी इसके जैसी सिर्फ़ दस सूरहें बनाकर दिखा दो।
इंसान दुनियावी ईजादात तो कर सकता है मगर क़ुरआन जैसी बेमिसाल बलाग़त, हिकमत और ग़ैब की ख़बरों से भरी एक आयत भी नहीं बना सकता।
यानी अपने तमाम बुतों, शायरों, काहिनों और मददगारों को बुला लो; पूरी दुनिया मिलकर भी क़ुरआन का मुक़ाबला नहीं कर सकती।
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