कुरान - 11:8 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

8
وَلَئِنۡ أَخَّرۡنَا عَنۡهُمُ ٱلۡعَذَابَ إِلَىٰٓ أُمَّةٖ مَّعۡدُودَةٖ لَّيَقُولُنَّ مَا يَحۡبِسُهُۥٓۗ أَلَا يَوۡمَ يَأۡتِيهِمۡ لَيۡسَ مَصۡرُوفًا عَنۡهُمۡ وَحَاقَ بِهِم مَّا كَانُواْ بِهِۦ يَسۡتَهۡزِءُونَ

Transliteration: (Wala'in akharnaa 'anhumul 'azaaba ilaaa ummatim ma'doodatil la yaqoolunna maa yahbisuh; alaa yawma ya'teehim laisa masroofan 'anhum wa haaqa bihim maa kaanoo bihee yastahzi'oon)

और अगर हम उनसे अज़ाब को एक गिनी-चुनी मुद्दत तक टाल दें [20], तो वे ज़रूर कहेंगे, 'उसे कौन सी चीज़ रोके हुए है?' सुन लो! जिस दिन वह उन पर आएगा, तो उनसे फेरा नहीं जाएगा, और उन्हें वही चीज़ घेर लेगी जिसका वे मज़ाक़ उड़ाते थे [21]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 8 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 8 की तफ़्सीर

✅ [20] ताख़ीर से धोखा खाना

इस आयत से मालूम होता है कि काफ़िर से अज़ाब कभी मुकम्मल नहीं टलता बल्कि हिकमत के तहत कुछ वक़्त के लिए मुल्तवी किया जाता है। मुनकिरीन इस मुहलत को बेबुनियाद समझकर मज़ाक़ उड़ाते हैं।

✅ [21] अज़ाब का यक़ीनी आना

जब अल्लाह का मुक़र्रर कर्दा वक़्त आ जाएगा, तो अज़ाब को कोई टाल नहीं सकेगा, और जिस अज़ाब का वे मज़ाक़ उड़ाते थे वही उन्हें हर तरफ़ से घेर लेगा।

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