कुरान - 11:6 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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۞وَمَا مِن دَآبَّةٖ فِي ٱلۡأَرۡضِ إِلَّا عَلَى ٱللَّهِ رِزۡقُهَا وَيَعۡلَمُ مُسۡتَقَرَّهَا وَمُسۡتَوۡدَعَهَاۚ كُلّٞ فِي كِتَٰبٖ مُّبِينٖ

Transliteration: (Wa maa min daaabbatin fil ardi illaa 'alal laahi rizquhaa wa ya'lamu mustaqarrahaa wa mustawda'ahaa; kullun fee Kitaabim Mubeen)

और ज़मीन में कोई चलने-फिरने वाला (जानदार) नहीं है [13] जिसका रिज़्क़ अल्लाह के ज़िम्मे न हो [14]। वह उसके रहने की जगह और उसके सौंपे जाने की जगह को जानता है [15]। सब कुछ एक रौशन किताब में दर्ज है [16]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 6 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 6 की तफ़्सीर

✅ [13] तमाम मख़लूक़ात के लिए अल्लाह का रिज़्क़

आयत में ज़मीन के जानदारों का ख़ास ज़िक्र इसलिए है क्योंकि वे हमारी नज़रों के सामने हैं। अलबत्ता तमाम मख़लूक़ात—हवा के परिंदे हों या समंदर की मछलियां—सबका रिज़्क़ अल्लाह ही के ज़िम्मे है।

✅ [14] दुनिया की फ़िक्र में आख़िरत को भूलना हिमाक़त है

इससे हम सीखते हैं कि इंसान के लिए यह बेवक़ूफ़ी है कि वह रिज़्क़ की तलाश में इतना डूब जाए कि अपने रब और आख़िरत को भूल जाए, जबकि रिज़्क़ का ज़िम्मा तो अल्लाह ने ले रखा है।

✅ [15] क़यामगाह और मुस्तक़र का इल्म

अल्लाह तआला जानता है कि हर मख़लूक़ कहां रहेगी, कहां दफ़्न होगी, और मौत के बाद उसका क्या ठिकाना होगा। कोई ज़र्रा भी उसके इल्म से बाहर नहीं।

✅ [16] लौहे महफ़ूज़ और इल्मे ग़ैब

यह याद रखना ज़रूरी है कि लौहे महफ़ूज़ पर सब कुछ लिखना इसलिए नहीं है कि अल्लाह को याद रखने के लिए इसकी ज़रूरत थी, बल्कि यह फ़रिश्तों और मख़लूक़ पर हुज्जत और अल्लाह के कमाल इल्म का इज़हार है।

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