कुरान - 11:7 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

7
وَهُوَ ٱلَّذِي خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ فِي سِتَّةِ أَيَّامٖ وَكَانَ عَرۡشُهُۥ عَلَى ٱلۡمَآءِ لِيَبۡلُوَكُمۡ أَيُّكُمۡ أَحۡسَنُ عَمَلٗاۗ وَلَئِن قُلۡتَ إِنَّكُم مَّبۡعُوثُونَ مِنۢ بَعۡدِ ٱلۡمَوۡتِ لَيَقُولَنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓاْ إِنۡ هَٰذَآ إِلَّا سِحۡرٞ مُّبِينٞ

Transliteration: (Wa Huwal lazee khalaqas samaawaati wal arda fee sittati aiyaaminw wa kaana 'Arshuhoo alal maaa'i liyabluwakum aiyukum ahsanu 'amalaa; wa la'in qulta innakum mab'oosoona min ba'dil mawti la yaqoolannal lazeena kafaroo in haazaaa illaa sihrum mubeen)

और वही है जिसने आसमानों और ज़मीन को छह दिनों में पैदा किया [17], और उसका अर्श पानी पर था, ताकि वह तुम्हें आज़माए कि तुम में से अमल के लिहाज़ से कौन सबसे अच्छा है [18]। और अगर आप कहें कि 'बेशक तुम मौत के बाद उठाए जाओगे,' तो काफ़िर ज़रूर कहेंगे कि 'यह तो सिर्फ़ खुला जादू है [19]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 7 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 7 की तफ़्सीर

✅ [17] आसमानों और ज़मीन की पैदाइश

आसमान और ज़मीन दोनों सात-सात हैं, और उनकी हालतें मुतफ़र्रिक़ हैं। अल्लाह ने इस अज़ीम कायनात को छह दिनों यानी छह मुद्दतों में हिकमत के साथ तख़लीक़ फ़रमाया।

✅ [18] तख़लीक़ का मक़सद: हुस्ने अमल की आज़माइश

आसमान, ज़मीन और तमाम कायनात की पैदाइश का मक़सद इंसान की आज़माइश है कि कौन नेकी, इख़्लास और पैरवी-ए-रसूल में बेहतरीन अमल करता है।

✅ [19] मुनकिरीन का रद्द: जादू का इल्ज़ाम

काफ़िर जब दोबारा ज़िंदा किए जाने की दलीलों को सुनते हैं, तो अपनी हठधर्मी और जिहालत की वजह से हक़ को 'खुला जादू' कहकर टालने की कोशिश करते हैं।

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