कुरान - 11:9 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

9
وَلَئِنۡ أَذَقۡنَا ٱلۡإِنسَٰنَ مِنَّا رَحۡمَةٗ ثُمَّ نَزَعۡنَٰهَا مِنۡهُ إِنَّهُۥ لَيَـُٔوسٞ كَفُورٞ

Transliteration: (Wa la'in azaqnal insaana minnaa rahmatan summa naza'naahaa minhu, innahoo laya'oosun kafoor)

और अगर हम इंसान को अपनी किसी रहमत का मज़ा चखाएं [21] फिर उसे उससे छीन लें, तो वह बड़ा मायूस और नाशुकरा हो जाता है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 9 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 9 की तफ़्सीर

✅ [21] रहमत और उसकी वापसी पर इंसान का रवैया

यहाँ 'इंसान' से मुराद आम तौर पर काफ़िर या ग़ाफ़िल इंसान है। जब उसे सेहत व दौलत मिलती है तो इतराता है, और जब आज़माइश आती है तो फ़ौरन अल्लाह की रहमत से नाउम्मीद होकर नाशुक्री करने लगता है।

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