कुरान - 11:34 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

34
وَلَا يَنفَعُكُمۡ نُصۡحِيٓ إِنۡ أَرَدتُّ أَنۡ أَنصَحَ لَكُمۡ إِن كَانَ ٱللَّهُ يُرِيدُ أَن يُغۡوِيَكُمۡۚ هُوَ رَبُّكُمۡ وَإِلَيۡهِ تُرۡجَعُونَ

Transliteration: (Wa laa yanfa'ukum nusheee in arattu an ansaha lakum in kaanal laahu yureedu ai yughwi yakum; Huwa Rabbukum wa ilaihi turja'oon)

और मेरी नसीहत तुम्हें कोई फ़ायदा नहीं पहुंचा सकती, अगर मैं तुम्हारा भला भी चाहूँ, जबकि अल्लाह ही तुम्हें गुमराह करने का इरादा फ़रमा चुका हो [75]। वही तुम्हारा रब है और उसी की तरफ़ तुम लौटाए जाओगे [76]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 34 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 34 की तफ़्सीर

✅ [75] हिदायत व गुमराही अल्लाह के इख़्तियार में

नबी का काम पैग़ाम पहुंचाना और खैरख़्वाही है, मगर दिल में हिदायत डालना अल्लाह ही के हाथ में है। जो शख़्स अपनी ज़िद से गुमराही को चुन लेता है, अल्लाह उस पर हिदायत के दरवाज़े बंद कर देता है।

✅ [76] रबूबियत और आख़िरत की वापसी

अल्लाह ही सबका ख़ालिक़ व मालिक है और सबको आख़िरकार उसी के हुज़ूर पेश होकर अपने आमाल का हिसाब देना है।

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