कुरान - 11:36 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

36
وَأُوحِيَ إِلَىٰ نُوحٍ أَنَّهُۥ لَن يُؤۡمِنَ مِن قَوۡمِكَ إِلَّا مَن قَدۡ ءَامَنَ فَلَا تَبۡتَئِسۡ بِمَا كَانُواْ يَفۡعَلُونَ

Transliteration: (Wa oohiya ilaa Noohin annahoo lany-yu'mina min qawmika illaa man qad aamana falaa tabta'is bimaa kaanoo yaf'aloon)

और नूह की तरफ़ वह्य भेजी गई कि 'आपकी क़ौम में से अब कोई ईमान नहीं लाएगा सिवाय उनके जो ईमान ला चुके हैं [78]। पस जो कुछ वे कर रहे हैं उस पर आप रंज न करें [79]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 36 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 36 की तफ़्सीर

✅ [78] मुनकिरीन पर हुज्जत तमाम

सैकड़ों साल की मुसलसल तबलीग़ के बाद अल्लाह ने नूह (अलै.) को बता दिया कि अब इनकी नस्लों में भी कोई ईमान लाने वाला नहीं है; इनके कुफ़्र की इंतिहा हो चुकी है।

✅ [79] नबी को तसल्ली

अल्लाह तआला ने नूह (अलै.) को तसल्ली दी कि उनके मज़ाक़ उड़ाने और सरकशी पर ग़मगीन न हों, क्योंकि अब उनके फ़ैसले का वक़्त क़रीब आ पहुंचा है।

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