Transliteration: (Wasna'il fulka bi-a'yuninaa wa wahyinaa wa laa tukhaa tibnee fil lazeena zalamoo; innahum mughraqoon)
अल्लाह तआला ने हज़रत नूह (अलै.) को हुक्म दिया कि हमारे फ़रिश्तों की निगरानी और वह्य की तालीम के मुताबिक़ एक अज़ीम किश्ती तैयार करें।
अल्लाह ने साफ़ फ़रमा दिया कि अब इन नाफ़रमानों और मुशरिकीन की माफ़ी या अज़ाब टलने की सिफ़ारिश न की जाए, क्योंकि उनके हक़ में अज़ाबे इलाही का फ़ैसला अटल हो चुका है।
ज़ालिमों का मुक़द्दर तूफ़ान के पानी में डूब कर हलाक होना तय हो चुका है, जिससे कोई ताक़त उन्हें नहीं बचा सकती।
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