कुरान - 11:37 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

37
وَٱصۡنَعِ ٱلۡفُلۡكَ بِأَعۡيُنِنَا وَوَحۡيِنَا وَلَا تُخَٰطِبۡنِي فِي ٱلَّذِينَ ظَلَمُوٓاْ إِنَّهُم مُّغۡرَقُونَ

Transliteration: (Wasna'il fulka bi-a'yuninaa wa wahyinaa wa laa tukhaa tibnee fil lazeena zalamoo; innahum mughraqoon)

और हमारी निगरानी में [80] और हमारी वह्य के मुताबिक़ किश्ती बनाइए। और ज़ालिमों के बारे में मुझसे कोई बात न कीजिए [81]; वे यक़ीनन डूबने वाले हैं [82]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 37 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 37 की तफ़्सीर

✅ [80] किश्ती की तामीर: हिफ़ाज़ते इलाही में

अल्लाह तआला ने हज़रत नूह (अलै.) को हुक्म दिया कि हमारे फ़रिश्तों की निगरानी और वह्य की तालीम के मुताबिक़ एक अज़ीम किश्ती तैयार करें।

✅ [81] ज़ालिमों के हक़ में दुआ की मुमानअत

अल्लाह ने साफ़ फ़रमा दिया कि अब इन नाफ़रमानों और मुशरिकीन की माफ़ी या अज़ाब टलने की सिफ़ारिश न की जाए, क्योंकि उनके हक़ में अज़ाबे इलाही का फ़ैसला अटल हो चुका है।

✅ [82] ग़र्क़ाब होने का क़तई फ़ैसला

ज़ालिमों का मुक़द्दर तूफ़ान के पानी में डूब कर हलाक होना तय हो चुका है, जिससे कोई ताक़त उन्हें नहीं बचा सकती।

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