कुरान - 11:35 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

35
أَمۡ يَقُولُونَ ٱفۡتَرَىٰهُۖ قُلۡ إِنِ ٱفۡتَرَيۡتُهُۥ فَعَلَيَّ إِجۡرَامِي وَأَنَا۠ بَرِيٓءٞ مِّمَّا تُجۡرِمُونَ

Transliteration: (Am yaqooloonaf taraahu qul inif taraituhoo fa'alaiya ijraamee wa ana bareee'um mimmaa tujrimoon)

क्या वे कहते हैं कि 'इन्होंने इसे ख़ुद गढ़ लिया है'? कह दीजिए, 'अगर मैंने इसे गढ़ा है तो मेरा जुर्म मुझ पर है, और मैं उन जुर्मों से बरी (अलग) हूँ जो तुम करते हो' [77]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 35 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 35 की तफ़्सीर

✅ [77] झूठे इल्ज़ाम का दो-टूक जवाब

अम्बिया-ए-किराम का दामन पाकीज़ा होता है। नबी ने साफ़ फ़रमा दिया कि अगर यह मेरा गढ़ा हुआ होता तो इसका गुनाह मुझ पर होता, मगर यह अल्लाह का कलाम है; और तुम्हारे शिर्क व कुफ़्र के जुर्म की ज़िम्मेदारी तुम पर है, मैं उससे पूरी तरह बेज़ार हूँ।

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