कुरान - 14:10 सूरह इब्राहीम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

10
۞قَالَتۡ رُسُلُهُمۡ أَفِي ٱللَّهِ شَكّٞ فَاطِرِ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۖ يَدۡعُوكُمۡ لِيَغۡفِرَ لَكُم مِّن ذُنُوبِكُمۡ وَيُؤَخِّرَكُمۡ إِلَىٰٓ أَجَلٖ مُّسَمّٗىۚ قَالُوٓاْ إِنۡ أَنتُمۡ إِلَّا بَشَرٞ مِّثۡلُنَا تُرِيدُونَ أَن تَصُدُّونَا عَمَّا كَانَ يَعۡبُدُ ءَابَآؤُنَا فَأۡتُونَا بِسُلۡطَٰنٖ مُّبِينٖ

Transliteration: (Qaalat Rusuluhum afillaahi shakkun faatiris samaawaati wal ardi yad'ookum liyaghfira lakum min zunoobikum wa yu'akhirakum ilaaa ajalin musammaa; qaaloo in antum illaa basharum mislunaa tureedoona an tasuddoonaa 'ammaa kaana ya'budu aabaaa'unaa fa'toonaa bi sultaanin mubeen)

उनके रसूलों ने कहा, "क्या अल्लाह के बारे में कोई संदेह है जो आकाशों और धरती का पैदा करने वाला है? वह तो तुम्हें इसलिए बुलाता है ताकि तुम्हारे कुछ गुनाहों को माफ़ कर दे और तुम्हें एक निश्चित अवधि तक मोहलत दे।" वे बोले, "तुम तो बस हमारे जैसे ही एक इंसान हो; तुम हमें उन चीज़ों (की पूजा) से रोकना चाहते हो जिनकी पूजा हमारे बाप-दादा करते आए हैं; अतः हमारे सामने कोई खुला प्रमाण (चमत्कार) ले आओ।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह इब्राहीम आयत 10 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह इब्राहीम – आयत 10 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] अफ़िल्लाहि शक्कून (अल्लाह के अस्तित्व व तौहीद पर क्या संदेह?)

इतनी महान कायनात को देखने के बाद क्या कोई विवेकशील व्यक्ति इसके रचयिता के वजूद और उसकी एकता पर शक कर सकता है? रसूलों ने समझाया कि अल्लाह तुम्हें तौबा और मग़फ़िरत के लिए बुला रहा है, मगर काफ़िरों ने वही पुरानी रट लगाई कि 'हमारे बाप-दादा के धर्म को हम नहीं छोड़ेंगे' और रसूल के इंसान होने पर ऐतराज़ किया।

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