कुरान - 14:11 सूरह इब्राहीम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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قَالَتۡ لَهُمۡ رُسُلُهُمۡ إِن نَّحۡنُ إِلَّا بَشَرٞ مِّثۡلُكُمۡ وَلَٰكِنَّ ٱللَّهَ يَمُنُّ عَلَىٰ مَن يَشَآءُ مِنۡ عِبَادِهِۦۖ وَمَا كَانَ لَنَآ أَن نَّأۡتِيَكُم بِسُلۡطَٰنٍ إِلَّا بِإِذۡنِ ٱللَّهِۚ وَعَلَى ٱللَّهِ فَلۡيَتَوَكَّلِ ٱلۡمُؤۡمِنُونَ

Transliteration: (Qaalat lahum Rusuluhum in nahnu illaa basharum mislukum wa laakinnal laaha yamunnu 'alaa mai yashaaa'u min 'ibaadihee wa maa kaana lanaaa an na'tiyakum bisul taanin illaa bi iznil laah; wa 'alal laahi falyatawakkalil mu'minoon)

उनके रसूलों ने उनसे कहा, "हम वास्तव में तुम्हारे जैसे ही इंसान हैं, परन्तु अल्लाह अपने बंदों में से जिस पर चाहता है अपना अनुग्रह (फ़ज़ल/नुबुव्वत) फ़रमाता है। और हमारा यह काम नहीं कि हम अल्लाह की अनुमति के बिना तुम्हारे पास कोई प्रमाण ले आएं; और ईमान वालों को तो केवल अल्लाह ही पर भरोसा (तवक्कुल) करना चाहिए। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह इब्राहीम आयत 11 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह इब्राहीम – आयत 11 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] नुबुव्वत का चयन और तवक्कुल

रसूलों ने स्वीकार किया कि शारीरिक बनावट में हम इंसान ही हैं, मगर अल्लाह जिसे चाहे अपनी रिसालत के लिए चुन लेता है। चमत्कार दिखाना नबी के हाथ में नहीं, केवल रब के हुक्म से होता है। मोमिनों का सहारा केवल अल्लाह की ज़ात है।

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