कुरान - 14:9 सूरह इब्राहीम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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أَلَمۡ يَأۡتِكُمۡ نَبَؤُاْ ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِكُمۡ قَوۡمِ نُوحٖ وَعَادٖ وَثَمُودَ وَٱلَّذِينَ مِنۢ بَعۡدِهِمۡ لَا يَعۡلَمُهُمۡ إِلَّا ٱللَّهُۚ جَآءَتۡهُمۡ رُسُلُهُم بِٱلۡبَيِّنَٰتِ فَرَدُّوٓاْ أَيۡدِيَهُمۡ فِيٓ أَفۡوَٰهِهِمۡ وَقَالُوٓاْ إِنَّا كَفَرۡنَا بِمَآ أُرۡسِلۡتُم بِهِۦ وَإِنَّا لَفِي شَكّٖ مِّمَّا تَدۡعُونَنَآ إِلَيۡهِ مُرِيبٖ

Transliteration: (Alam ya'tikum naba'ul lazeena min qablikum qawmi Noohinw wa 'Aadinw wa Samood, wallazeena mim ba'dihim; laa ya'lamuhum illallaah; jaaa'at hum Rusuluhum bilbaiyinaati faraddooo aydiyahum feee afwaahihim wa qaalooo innaa kafarnaa bimaaa ursiltum bihee wa innaa lafee shakkim mimmaa tad'oonanaaa ilaihi mureeb)

क्या तुम्हारे पास उन लोगों की ख़बर नहीं पहुंची जो तुमसे पहले थे—नूह की क़ौम, आद, समूद और वे लोग जो उनके बाद आए, जिन्हें अल्लाह के सिवा कोई नहीं जानता? उनके रसूल उनके पास स्पष्ट प्रमाण लेकर आए, तो उन्होंने अपने हाथ अपने मुंहों में दबा लिए और बोले, "हम उस चीज़ का इनकार करते हैं जिसके साथ तुम भेजे गए हो, और हम उस चीज़ के बारे में बड़े बेचैन कर देने वाले संदेह में हैं जिसकी ओर तुम हमें बुलाते हो।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह इब्राहीम आयत 9 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह इब्राहीम – आयत 9 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] प्राचीन क़ौमों की हठधर्मी और झुठलाना

हज़रत नूह, हूद और सालेह की क़ौमों ने नबियों की खुली निशानियों को देखकर भी गुस्से और झल्लाहट से अपने हाथ मुंह में दबा लिए (या रसूलों के मुंह पर हाथ रखकर उन्हें चुप कराना चाहा) और तौहीद की दावत पर शक व अविश्वास जताया।

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