Transliteration: (Wa iz ta azzana Rabbukum la'in shakartum la azeedannakum wa la'in kafartum inna 'azaabee lashadeed)
यह क़ुरआन की एक अत्यधिक महत्वपूर्ण और सुनहरी आयत है। जो बंदा अल्लाह की दी हुई नेमतों (स्वास्थ्य, रिज़्क़, ईमान, शांति) पर दिल, ज़बान और आमाल से शुक्र अदा करता है, अल्लाह उसकी नेमतों में निरंतर वृद्धि फ़रमाता है; जबकि नाशुक्री करने वालों से नेमतें छीन ली जाती हैं और वे सज़ा के हक़दार बनते हैं।
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