कुरान - 14:7 सूरह इब्राहीम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

7
وَإِذۡ تَأَذَّنَ رَبُّكُمۡ لَئِن شَكَرۡتُمۡ لَأَزِيدَنَّكُمۡۖ وَلَئِن كَفَرۡتُمۡ إِنَّ عَذَابِي لَشَدِيدٞ

Transliteration: (Wa iz ta azzana Rabbukum la'in shakartum la azeedannakum wa la'in kafartum inna 'azaabee lashadeed)

और याद करो जब तुम्हारे रब ने सचेत कर दिया था कि, "यदि तुम कृतज्ञता (शुक्र) व्यक्त करोगे तो मैं तुम्हें अवश्य और अधिक दूंगा; और यदि तुम कृतघ्नता (नाशुक्री/कुफ़्र) करोगे तो निश्चय ही मेरा अज़ाब बहुत कठोर है।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह इब्राहीम आयत 7 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह इब्राहीम – आयत 7 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] ल-इन शक़रतुम ल-अज़ीदन्नकुम (शुक्र का ईश्वरीय नियम)

यह क़ुरआन की एक अत्यधिक महत्वपूर्ण और सुनहरी आयत है। जो बंदा अल्लाह की दी हुई नेमतों (स्वास्थ्य, रिज़्क़, ईमान, शांति) पर दिल, ज़बान और आमाल से शुक्र अदा करता है, अल्लाह उसकी नेमतों में निरंतर वृद्धि फ़रमाता है; जबकि नाशुक्री करने वालों से नेमतें छीन ली जाती हैं और वे सज़ा के हक़दार बनते हैं।

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