कुरान - 14:25 सूरह इब्राहीम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

25
تُؤۡتِيٓ أُكُلَهَا كُلَّ حِينِۭ بِإِذۡنِ رَبِّهَاۗ وَيَضۡرِبُ ٱللَّهُ ٱلۡأَمۡثَالَ لِلنَّاسِ لَعَلَّهُمۡ يَتَذَكَّرُونَ

Transliteration: (Tu'teee ukulahaa kulla heenim bi izni Rabbihaa; wa yadribul laahul amsaala linnaasi la'allahum yatazak karoon)

वह अपने रब के आदेश से हर समय अपना फल देता रहता है; और अल्लाह लोगों के लिए मिसालें बयान करता है ताकि वे नसीहत स्वीकार करें। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह इब्राहीम आयत 25 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह इब्राहीम – आयत 25 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] ईमान के निरंतर फल

जिस प्रकार वह पवित्र वृक्ष हमेशा मीठा फल देता है, उसी प्रकार एक सच्चे मोमिन का दिल हर पल अल्लाह की याद, नेक आमाल, सदक़ा और अच्छे अख़लाक़ के रूहानी फल पैदा करता रहता है जो अल्लाह की बारगाह में क़ुबूल होते हैं।

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