कुरान - 14:26 सूरह इब्राहीम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

26
وَمَثَلُ كَلِمَةٍ خَبِيثَةٖ كَشَجَرَةٍ خَبِيثَةٍ ٱجۡتُثَّتۡ مِن فَوۡقِ ٱلۡأَرۡضِ مَا لَهَا مِن قَرَارٖ

Transliteration: (Wa masalu kalimatin khabeesatin kashajaratin khabee satinij tussat min fawqil ardi maa lahaa min qaraar)

और एक अपवित्र (बुरे) वचन की मिसाल एक ऐसे गंदे और सड़े हुए वृक्ष जैसी है जिसे धरती के ऊपर ही से उखाड़ फेंका गया हो, जिसे ज़रा भी स्थिरता (ठहराव) प्राप्त न हो। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह इब्राहीम आयत 26 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह इब्राहीम – आयत 26 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] कलिमा-ए-ख़बीसा (कुफ़्र व शिर्क) की मिसाल थूहड़ या जंगली झाड़ी से

'कलिमा-ए-ख़बीसा' से मुराद कुफ़्र, शिर्क और झूठ की बातें हैं। इसकी मिसाल उस बदबूदार, कड़वे और ज़हरीले पौधे (जैसे इन्ज़ल/थूहड़) जैसी है जिसकी कोई जड़ ज़मीन में नहीं होती, ज़रा-सी हवा से उखड़ जाता है। असत्य के पास न कोई दलील होती है और न कोई स्थिरता।

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